सर्वांगासन (Shoulder Stand) करने की विधि, लाभ और सावधानियां
कैसे करें सर्वांगासन?
-
शुरुआत की स्थिति:
- योगा मैट पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
- हाथों को शरीर के बगल में रखें और पैरों को साथ जोड़कर रखें।
-
पैरों को उठाना:
- धीरे-धीरे दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं (लगभग 90° तक)।
- इसके बाद, हाथों से कमर को सपोर्ट देते हुए पैरों को और ऊपर उठाएं, ताकि शरीर उल्टा हो जाए।
-
शरीर को संतुलित करना:
- कोहनियों को जमीन पर टिकाएं और हाथों से पीठ को सहारा दें।
- ठोड़ी को छाती से लगाएं और नजर पैरों की ओर रखें।
- पूरे शरीर का भार कंधों पर होना चाहिए, सिर और गर्दन को ज़्यादा दबाव न दें।
-
सांस और स्थिति बनाए रखना:
- इस मुद्रा में 15-30 सेकंड तक बने रहें (शुरुआत में कम समय तक करें, फिर धीरे-धीरे बढ़ाएं)।
- गहरी और धीमी सांसें लें।
-
मुद्रा से बाहर आना:
- धीरे-धीरे कमर और पैरों को नीचे लाएं और पीठ को जमीन पर सीधा रखें।
- कुछ सेकंड शवासन (शिथिलता की मुद्रा) में विश्राम करें।
सर्वांगासन के लाभ
✅ थायरॉयड और पिट्यूटरी ग्रंथि को सक्रिय करता है – यह मुद्रा थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित कर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
✅ रक्त संचार में सुधार करता है – शरीर उल्टा होने से हृदय को बेहतर रक्त संचार करने में मदद मिलती है।
✅ रीढ़ की हड्डी और पीठ के लिए फायदेमंद – यह आसन रीढ़ को मजबूत बनाता है और पीठ दर्द को कम करने में सहायक है।
✅ तनाव और चिंता कम करता है – सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ने से मानसिक शांति मिलती है।
✅ पाचन में सुधार करता है – यह मुद्रा पाचन तंत्र को सक्रिय कर कब्ज और एसिडिटी को दूर करने में मदद करती है।
✅ हॉर्मोन संतुलन बनाए रखता है – महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता और रजोनिवृत्ति के लक्षणों में सुधार करता है।
✅ चेहरे की चमक बढ़ाता है – रक्त प्रवाह बढ़ने से त्वचा में निखार आता है।
सावधानियां
⚠ गर्दन या पीठ में चोट हो तो न करें – यदि आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क या गर्दन में कोई समस्या है, तो यह आसन न करें।
⚠ उच्च रक्तचाप या हृदय रोग वाले लोग न करें – इस मुद्रा में सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे हाई बीपी या हृदय रोगियों को दिक्कत हो सकती है।
⚠ मासिक धर्म और गर्भावस्था में न करें – महिलाओं को पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान इस आसन से बचना चाहिए।
⚠ ग्लूकोमा या आंखों की समस्या हो तो न करें – यह मुद्रा आंखों पर दबाव डाल सकती है, जिससे ग्लूकोमा या आंखों की अन्य समस्याओं वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।
⚠ शुरुआत में किसी प्रशिक्षक की देखरेख में करें – यदि आप पहली बार यह मुद्रा कर रहे हैं, तो किसी योग विशेषज्ञ की मदद लें।
संभावित प्रश्न:
❓ क्या मैं सर्वांगासन को रोज़ कर सकता हूँ?
✔ हां, लेकिन 1-2 मिनट से अधिक समय तक न करें और शरीर की प्रतिक्रिया को देखें।
❓ क्या सर्वांगासन से वजन कम होता है?
✔ हां, यह मेटाबोलिज्म बढ़ाने और हार्मोन संतुलन में मदद करता है, जिससे वजन नियंत्रित होता है।
❓ क्या सर्वांगासन को रात में किया जा सकता है?
✔ इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है, लेकिन रात में हल्के भोजन के 3-4 घंटे बाद किया जा सकता है।
अगर आपको इसे सीखने में कोई कठिनाई हो रही है या किसी विशेष योग मुद्रा के साथ इसे जोड़ना चाहते हैं, तो मुझे बताएं! 😊
Post a Comment