भाग 3 – स्तन कैंसर के प्रकार (Types of Breast Cancer)

 

भाग 3 – स्तन कैंसर के प्रकार (Types of Breast Cancer)

प्रस्तावना

स्तन कैंसर एक ही तरह का नहीं होता। यह अलग-अलग कोशिकाओं में, अलग-अलग स्थानों पर और अलग-अलग व्यवहार (aggressiveness) के साथ विकसित हो सकता है। इसलिए इसके प्रकारों (Types) को समझना बेहद ज़रूरी है। स्तन कैंसर का सही प्रकार जानकर ही डॉक्टर उपचार की योजना बनाते हैं।


1. डक्टल कार्सिनोमा (Ductal Carcinoma)

यह स्तन कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है।

(क) डक्टल कार्सिनोमा इन-सिचू (DCIS)

  1. यह शुरुआती कैंसर है जो केवल दूध ले जाने वाली नलिकाओं (ducts) तक सीमित रहता है।
  2. अभी तक यह आसपास के ऊतकों में नहीं फैला होता।
  3. इसे Stage 0 कैंसर माना जाता है।
  4. यदि समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज आसान और सफल होता है।

(ख) इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा (IDC)

  1. यह सबसे सामान्य स्तन कैंसर है (कुल मामलों का लगभग 70–80%)।
  2. यह नलिकाओं से बाहर निकलकर आसपास के स्तन ऊतकों और लसीका ग्रंथियों तक फैल सकता है।
  3. कई बार यह शरीर के अन्य हिस्सों (हड्डियाँ, फेफड़े, लिवर) तक भी फैल जाता है।


2. लॉब्युलर कार्सिनोमा (Lobular Carcinoma)

यह दूध बनाने वाली ग्रंथियों (lobules) में शुरू होता है।

(क) लॉब्युलर कार्सिनोमा इन-सिचू (LCIS)

  • तकनीकी रूप से यह कैंसर नहीं है बल्कि एक "चेतावनी संकेत" है।
  • इसका मतलब है कि स्तनों में असामान्य कोशिकाएँ पाई गई हैं और भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

(ख) इनवेसिव लॉब्युलर कार्सिनोमा (ILC)

  • यह ग्रंथियों से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों और अंगों में फैल सकता है।
  • यह कैंसर कभी-कभी पहचानने में मुश्किल होता है क्योंकि यह धीरे-धीरे और फैले हुए रूप में बढ़ता है।


3. ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple Negative Breast Cancer – TNBC)

  • यह सबसे आक्रामक प्रकार का कैंसर माना जाता है।
  • इसमें तीन प्रमुख रिसेप्टर (Estrogen, Progesterone, HER2) नहीं पाए जाते।
  • चूंकि यह हार्मोन और टार्गेटेड दवाइयों पर प्रतिक्रिया नहीं देता, इसलिए इसका उपचार मुश्किल होता है।
  • यह ज्यादातर युवा महिलाओं और अफ्रीकी मूल की महिलाओं में देखा जाता है।


4. HER2-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर

  • इस प्रकार के कैंसर में HER2 नामक प्रोटीन की मात्रा अत्यधिक होती है।
  • यह प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को तेज कर देता है।
  • हालांकि, इसके लिए विशेष टार्गेटेड थेरेपी उपलब्ध हैं, जैसे ट्रास्टुज़ुमैब (Herceptin), जो अच्छे परिणाम देती हैं।


5. इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर (IBC)

  • यह एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत आक्रामक प्रकार का कैंसर है।
  • इसमें स्तन लाल, सूजे हुए और गर्म महसूस होते हैं, जैसे संक्रमण हो गया हो।
  • स्तन की त्वचा पर गड्ढेदार सतह (Peau d’orange) दिखाई देती है।
  • यह तेजी से लसीका नलिकाओं में फैलता है, इसलिए देर होने पर खतरनाक साबित हो सकता है।


6. पैगेट्स डिज़ीज ऑफ निप्पल (Paget’s Disease of Nipple)

  • इसमें कैंसर कोशिकाएँ निप्पल और एरिओला की सतह पर बनती हैं।
  • लक्षणों में खुजली, लालिमा, जलन और निप्पल से तरल निकलना शामिल है।
  • यह प्रायः डक्टल कार्सिनोमा से जुड़ा हुआ होता है।


7. एंगुलर और मेटास्टेटिक कैंसर

  • मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर (Stage IV): यह कैंसर तब कहलाता है जब कोशिकाएँ स्तन और बगल से निकलकर दूरस्थ अंगों (हड्डियाँ, फेफड़े, लिवर, मस्तिष्क) तक पहुँच जाती हैं।
  • यह कैंसर "लाइलाज" माना जाता है, लेकिन आधुनिक इलाज से लंबे समय तक जीवन जीना संभव है।


8. दुर्लभ प्रकार के स्तन कैंसर

  1. मेडुलरी कार्सिनोमा:

    • यह अपेक्षाकृत कम आक्रामक होता है।

    • इसमें ट्यूमर मुलायम और सीमित रहता है।

  2. ट्यूबलर कार्सिनोमा:

    • बहुत छोटा और धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर।

    • जल्दी पकड़ में आने पर आसानी से ठीक हो जाता है।

  3. म्यूकिनस कार्सिनोमा:

    • इसमें कैंसर कोशिकाएँ म्यूकस (चिपचिपे पदार्थ) में फंसी होती हैं।

    • यह अपेक्षाकृत कम आक्रामक होता है।

  4. फाइलोड्स ट्यूमर (Phyllodes Tumor):

    • यह ट्यूमर ग्रंथियों की बजाय संयोजी ऊतक (connective tissue) में विकसित होता है।

    • अधिकांश मामले गैर-कैंसर (benign) होते हैं, लेकिन कुछ कैंसरयुक्त भी हो सकते हैं।


9. हार्मोनल रिसेप्टर आधारित वर्गीकरण

डॉक्टर अक्सर स्तन कैंसर को कोशिकाओं में पाए जाने वाले हार्मोन रिसेप्टर के आधार पर वर्गीकृत करते हैं:

  • ER-पॉजिटिव (Estrogen Receptor Positive):
  • इसमें कोशिकाएँ एस्ट्रोजन से प्रभावित होती हैं।
  • हार्मोन थेरेपी (जैसे टैमोक्सीफेन) से इसका इलाज किया जाता है।
  • PR-पॉजिटिव (Progesterone Receptor Positive):
  • इसमें कोशिकाएँ प्रोजेस्टेरोन से प्रभावित होती हैं।
  • HER2-पॉजिटिव:
  • इसमें HER2 प्रोटीन की अधिकता होती है।
  • Triple Negative:
  • इसमें तीनों रिसेप्टर नहीं होते।

आयुर्वेद और योग की दृष्टि से प्रकार

आयुर्वेद में कैंसर को "अर्बुद" कहा गया है।

  • कफज अर्बुद: धीरे-धीरे बढ़ने वाले ट्यूमर।
  • पित्तज अर्बुद: लालिमा, जलन और तेजी से फैलने वाले ट्यूमर।
  • वातज अर्बुद: दर्द और सूजन के साथ विकसित होने वाले ट्यूमर।

योगिक दृष्टि से, अलग-अलग प्रकार के कैंसर को शरीर और मन के ऊर्जा असंतुलन (Pranic Imbalance) का परिणाम माना जाता है।


निष्कर्ष (भाग 3 का सार)

स्तन कैंसर कई प्रकार का हो सकता है। किसी महिला को किस प्रकार का कैंसर है, यह जानना सबसे पहली और जरूरी जानकारी होती है। इससे डॉक्टर को उपचार चुनने में मदद मिलती है और रोगी को सही दिशा मिलती है।

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