उत्कटासन संस्कृत शब्द "उत्कट" और "आसन" से बना है।
"उत्कट" का अर्थ होता है तीव्र, मजबूत या शक्तिशाली।
"आसन" का अर्थ होता है बैठने या स्थिति।
इसलिए, उत्कटासन का अर्थ है "शक्तिशाली मुद्रा" या "कुर्सी जैसा आसन"। इस आसन में शरीर की स्थिति ऐसी होती है जैसे कोई अदृश्य कुर्सी पर बैठा हो, इसलिए इसे "चेयर पोज़" (Chair Pose) भी कहा जाता है।
उत्कटासन करने की विधि
1. समतल स्थान पर खड़े हो जाएं, पैरों को थोड़ा अलग रखें।
2. दोनों हाथों को सामने या सिर के ऊपर उठाएं , हथेलियां एक-दूसरे की ओर हों।
3. श्वास लेते हुए घुटनों को मोड़ें और धीरे-धीरे कमर नीचे करें, जैसे कि कुर्सी पर बैठ रहे हों।
4. जांघों को फर्श के समानांतर लाने की कोशिश करें और पीठ को सीधा रखें।
5. छाती को खुला रखें और संतुलन बनाए रखें।
6. 10-30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें, धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
7. श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे खड़े हो जाएं और आसन को दोहराएं।
उत्कटासन के लाभ
✔ जांघों, पिंडलियों और पैरों को मजबूत बनाता है।
✔ रीढ़ की हड्डी और शरीर के संतुलन को सुधारता है।
✔ पेट की चर्बी कम करने में सहायक।
✔ घुटनों और टखनों को मजबूती देता है।
✔ पाचन क्रिया में सुधार करता है और आंतों को सक्रिय करता है।
✔ एकाग्रता और मानसिक शक्ति बढ़ाता है।
सावधानियां
❌ घुटनों या जोड़ों में दर्द हो तो यह आसन न करें।
❌ हृदय रोगी और उच्च रक्तचाप के मरीज सावधानी बरतें।
❌ पीठ दर्द या स्लिप डिस्क की समस्या हो तो इसे करने से बचें।
❌ गर्भवती महिलाएं डॉक्टर या योग प्रशिक्षक की सलाह लें।
❌ आसन करते समय घुटने पंजों से आगे न जाएं, संतुलन बनाए रखें।
यदि आप शुरुआत कर रहे हैं, तो इसे पहले हल्के झुकाव के साथ करें और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।
Post a Comment