What is Prithvi Mudra, what are its benefits, disadvantages and precautions. ( पृथ्वी मुद्रा क्या है लाभ हानि सावधानियां क्या-क्या है । )

Prathvi Mudra 
( पृथ्वी मुद्रा )

पृथ्वी मुद्रा एक ध्यान योग है. यह मुद्रा करने से शरीर में पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है और अग्नि तत्व का नाश होता है।

जिनका संबंध शरीर के आकाश तत्व और पृथ्वी तत्व से है। अनामिका उंगली और अंगूठे के सिरे को परस्पर मिलाने से पृथ्वी मुद्रा बनती है। इस मुद्रा को करने से शरीर में पृथ्वी तत्व बढ़कर सम होता है।



Method of doing Prithvi Mudra 
( पृथ्वी मुद्रा करने का तरीका ):-

  1. सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं।
  2. अपनी हथेलियों को जांघों पर रखें।
  3. अब अनामिका (रिंग फ़िंगर) को अंगूठे के टिप से जोड़ें।
  4. बहुत ज़्यादा दबाव न डालें।
  5. ऐसा दोनों हाथों से करें।
  6. बाकी की उंगलियों को सीधा रखें।
  7. 10-15 मिनट के लिए इसी मुद्रा में बैठें।
  8. धीरे-धीरे सांस लें।


Advantages of Prithvi Mudra 
( पृथ्वी मुद्रा के फायदे ):-

  1. इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  2. यह मुद्रा शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है।
  3. इससे बालों का झड़ना कम होता है और नए बाल उगते हैं।
  4. यह मुद्रा वज़न बढ़ाने में मदद करती है।
  5. इससे चेहरा चमकदार बनता है।
  6. यह मुद्रा मस्तिष्क को अधिक क्रियाशील बनाती है।
  7. इससे पाचन शक्ति अच्छी होती है।
  8. यह मुद्रा हर्निया में भी फ़ायदेमंद है।
  9. यह मुद्रा समय से पहले बाल सफ़ेद होने की समस्या और हाइपरटेंशन में भी राहत दिलाती है।

What are the precautions while doing Prithvi Mudra 
( पृथ्वी मुद्रा करने से क्या क्या सावधानियां है ):-

  1. अगर आपको कफ़ दोष है, तो इस मुद्रा को ज़्यादा समय के लिए न करें या किसी योग विशेषज्ञ से सलाह लें।
  2. अगर आपको अस्थमा या सांस की कोई समस्या है, तो बिना किसी योग विशेषज्ञ की सलाह के इस मुद्रा को न करें। 
  3. जब आपको इस मुद्रा से फ़ायदा मिल जाए, तो इसे करना बंद कर दें क्योंकि यह मुद्रा तंत्रिका तंत्र को अनियंत्रित कर सकती है।
  4. पृथ्वी मुद्रा करते समय, अपनी तर्जनी, मध्यमा, और छोटी उंगली को ज़्यादा खींचने की कोशिश न करें।
  5. अंगूठे और अनामिका के अग्रभागों को ज़्यादा दबाने की कोशिश न करें।
  6. हाथों और बाज़ुओं को शिथिल रखें ताकि उनमें ऊर्जा का सही प्रवाह हो सके।
  7. योग छात्रों को योग शिक्षक के मार्गदर्शन में पृथ्वी मुद्रा करनी चाहिए।


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