गर्भाशय में सूजन और गांठ के कारण और योग से उपचार ( Causes of swelling and lump in the uterus and treatment with yoga )

 

गर्भाशय में सूजन और गांठ के कारण और योग से उपचार

📌 गर्भाशय में सूजन और गांठ के मुख्य कारण:

  1. हार्मोनल असंतुलन – एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के असंतुलन के कारण गांठ और सूजन हो सकती है।
  2. पीसीओएस (PCOS) या ओवेरियन सिस्ट – अंडाशय में गांठ बनने का प्रमुख कारण।
  3. एंडोमेट्रियोसिस – जब गर्भाशय की अंदरूनी परत बाहर बढ़ने लगती है, तो दर्द और सूजन होती है।
  4. फाइब्रॉइड (Uterine Fibroids) – ये गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर होते हैं, जो भारी मासिक धर्म और दर्द का कारण बन सकते हैं।
  5. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ (PID) – गर्भाशय में संक्रमण के कारण सूजन हो सकती है।
  6. तनाव और अनियमित जीवनशैली – ज्यादा तनाव और गलत खानपान भी गर्भाशय की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

🧘 योग से गर्भाशय की सूजन और गांठ ठीक करने के उपाय

योगासन रक्त संचार को सुधारते हैं, हार्मोनल बैलेंस लाते हैं और गर्भाशय की कार्यक्षमता को बेहतर बनाते हैं।

1. भद्रासन (Bhadrasana - Butterfly Pose)

👉 फायदे – हार्मोन संतुलन करता है, पेल्विक एरिया में रक्त संचार बढ़ाता है और गर्भाशय को स्वस्थ रखता है।
👉 कैसे करें

  • पैरों को सामने रखकर तलवों को आपस में जोड़ें।
  • धीरे-धीरे पैरों को ऊपर-नीचे करें, जैसे तितली के पंख हिलते हैं।
  • 2-5 मिनट तक करें।

2. सुप्त बद्ध कोणासन (Supta Baddha Konasana - Reclining Butterfly Pose)

👉 फायदे – गर्भाशय की सूजन को कम करता है और रिलैक्सेशन देता है।
👉 कैसे करें

  • भद्रासन में बैठकर धीरे-धीरे पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को आराम से रखें और लंबी सांसें लें।
  • इसे 3-5 मिनट तक करें।

3. बालासन (Balasana - Child's Pose)

👉 फायदे – तनाव कम करता है, पेल्विक एरिया की नसों को आराम देता है।
👉 कैसे करें

  • घुटनों के बल बैठें और हाथों को आगे की ओर फैलाते हुए सिर जमीन पर रखें।
  • 1-2 मिनट तक गहरी सांस लेते रहें।

4. भुजंगासन (Bhujangasana - Cobra Pose)

👉 फायदे – गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और सूजन को कम करता है।
👉 कैसे करें

  • पेट के बल लेटकर हाथों को कंधों के नीचे रखें।
  • सांस भरते हुए सिर और छाती को ऊपर उठाएं।
  • कुछ सेकंड रुकें और सांस छोड़ते हुए वापस आएं।

5. सेतुबंधासन (Setu Bandhasana - Bridge Pose)

👉 फायदे – प्रजनन अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, हार्मोन बैलेंस करता है।
👉 कैसे करें

  • पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को फर्श पर रखें।
  • धीरे-धीरे कमर को ऊपर उठाएं और 30 सेकंड तक रोकें।
  • इसे 3-4 बार दोहराएं।

6. विपरीत करणी (Viparita Karani - Legs Up the Wall Pose)

👉 फायदे – गर्भाशय में रक्त प्रवाह बढ़ाता है, सूजन को कम करता है और हार्मोन बैलेंस करता है।
👉 कैसे करें

  • दीवार के पास लेटकर पैरों को दीवार पर सीधा रखें।
  • दोनों हाथ बगल में रखें और गहरी सांसें लें।
  • 5-10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

7. अनुलोम-विलोम प्राणायाम

👉 फायदे – तनाव कम करता है, हार्मोनल बैलेंस करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।
👉 कैसे करें

  • एक नासिका छिद्र को बंद करें और दूसरी से सांस लें, फिर बदलकर दोहराएं।
  • 5-10 मिनट तक करें।

🌿 अतिरिक्त सुझाव:

संतुलित आहार लें – हरी सब्जियां, फल, मेवे, दही, हल्दी और अदरक को शामिल करें।
जंक फूड और चीनी कम करें – ये हार्मोन असंतुलन बढ़ाते हैं।
गर्म पानी से सिकाई करें – पेट दर्द और सूजन में राहत मिलेगी।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां लें – अशोक, शतावरी, त्रिफला और एलोवेरा मददगार हैं।
नियमित योग और व्यायाम करें – शरीर को एक्टिव रखना जरूरी है।
तनाव कम करें – मेडिटेशन और माइंडफुलनेस का अभ्यास करें।

अगर समस्या गंभीर हो तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। योग के साथ सही आहार और जीवनशैली अपनाकर गर्भाशय को स्वस्थ रखा जा सकता है। 😊

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