जल नेति एक प्राचीन योगिक क्रिया है जो नाक की सफाई के लिए की जाती है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने, साइनस को साफ करने और एलर्जी से राहत पाने में मदद करती है। जल नेति करने से नाक के मार्गों में जमा धूल, बलगम और अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं, जिससे श्वसन प्रणाली बेहतर काम करती है।
जल नेति करने की विधि
आवश्यक सामग्री:
- नेति पॉट: एक विशेष छोटा बर्तन जिसमें लंबी नली होती है।
- गुनगुना पानी: हल्का गर्म, शरीर के तापमान के समान (36-40°C)।
- सेंधा नमक: शुद्ध नमक, लगभग 1/2 चम्मच प्रति 500 मिलीलीटर पानी।
करने की प्रक्रिया:
सही स्थिति लें:
- सिंक या खुले क्षेत्र के सामने खड़े हों।
- सिर को हल्का झुका लें और थोड़ा बगल की ओर मोड़ें।
नेति पॉट में पानी भरें:
- गुनगुने पानी में सेंधा नमक मिलाकर अच्छी तरह घोल लें।
नाक के एक छिद्र में डालें:
- नेति पॉट की नोक को एक नथुने में रखें।
- धीरे-धीरे पॉट को झुकाएं ताकि पानी नाक में प्रवेश करे और दूसरे नथुने से बाहर आ जाए।
सांस लेने में सावधानी रखें:
- मुँह से सांस लें और प्रक्रिया को आराम से करें।
- पूरे पॉट का पानी खत्म होने के बाद दूसरी नथुने से दोहराएं।
नाक सुखाएं:
- क्रिया के बाद सिर झुकाकर, हल्के झटकों से नाक से पानी निकालें।
- कुछ बार तेजी से सांस छोड़ें ताकि बचा हुआ पानी पूरी तरह निकल जाए।
जल नेति के लाभ
- नाक की सफाई: धूल, धुआँ, एलर्जी कारक और बलगम को हटाता है।
- साइनस की समस्या में राहत: साइनसाइटिस और सिरदर्द में फायदेमंद।
- एलर्जी और सर्दी से बचाव: जुकाम, फ्लू और एलर्जी को रोकने में सहायक।
- श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है: अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में सहायक।
- मस्तिष्क को शांत करता है: मानसिक तनाव और अनिद्रा में राहत।
सावधानियाँ:
- जल नेति हमेशा खाली पेट करें।
- ठंडे या बहुत गर्म पानी का उपयोग न करें।
- प्रक्रिया के बाद नाक को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, अन्यथा संक्रमण हो सकता है।
- यदि नाक में संक्रमण या गंभीर बंद नाक की समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
जल नेति करने का सही समय
- सुबह के समय, नहाने से पहले।
- आवश्यकता हो तो शाम को भी किया जा सकता है।
- रोज़ाना या सप्ताह में 3-4 बार अभ्यास करना लाभदायक है।
जल नेति को नियमित रूप से करने से श्वसन तंत्र मजबूत होता है और मन-मस्तिष्क भी शांत रहता है।

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