योगाभ्यास से पीसीओडी को कैसे ठीक किया जा सकता है? ( How can PCOD be cured by practicing yoga? )


 योगाभ्यास पीसीओडी (PCOD) को प्रबंधित करने और लक्षणों को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी हो सकता है। योग न केवल हार्मोनल संतुलन बहाल करने में मदद करता है बल्कि तनाव कम करता है, वजन को नियंत्रित करता है और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करता है।

पीसीओडी में योग के लाभ:

  1. हार्मोनल संतुलन: योग अभ्यास एंडोक्राइन सिस्टम को दुरुस्त करता है और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है।
  2. मासिक धर्म चक्र को नियमित करना: योगासन प्रजनन अंगों को सक्रिय कर नियमित पीरियड्स में सहायता करते हैं।
  3. इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाना: योग रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कम करता है।
  4. वजन प्रबंधन: योग चयापचय दर (Metabolism) को बढ़ाकर वजन घटाने में मदद करता है।
  5. तनाव और चिंता को कम करना: ध्यान और प्राणायाम तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करते हैं, जिससे पीसीओडी के लक्षणों में सुधार होता है।

पीसीओडी में लाभकारी योगासन:

1. भुजंगासन (Cobra Pose)

  • अंडाशय और गर्भाशय को उत्तेजित करता है
  • रक्त प्रवाह में सुधार करता है
  • हार्मोनल संतुलन में सहायक
  • कैसे करें: पेट के बल लेटकर हाथों से शरीर को ऊपर उठाएं और गर्दन पीछे की ओर झुकाएं।

2. धनुरासन (Bow Pose)

  • प्रजनन अंगों की कार्यक्षमता बढ़ाता है
  • मासिक धर्म अनियमितता में लाभकारी
  • कैसे करें: पेट के बल लेटकर पैरों को पकड़कर शरीर को खींचें और धनुष का आकार बनाएं।

3. सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Butterfly Pose)

  • अंडाशय को सक्रिय करता है
  • तनाव को कम करता है
  • हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है
  • कैसे करें: पीठ के बल लेटकर पैरों को मोड़ें और तलवों को जोड़कर घुटनों को बाहर की ओर फैलाएं।

4. मलासन (Garland Pose)

  • पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है
  • प्रजनन अंगों को मजबूत करता है
  • कैसे करें: पैरों को फैलाकर बैठें, कोहनियों को घुटनों के बीच रखें और हाथों को प्रार्थना मुद्रा में रखें।

5. नौकासन (Boat Pose)

  • पेट की चर्बी कम करता है
  • मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है
  • कैसे करें: पीठ के बल लेटकर पैरों और हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को 'V' आकार दें।

6. बालासन (Child's Pose)

  • तनाव और चिंता को दूर करता है
  • हार्मोनल संतुलन में सहायक
  • कैसे करें: घुटनों के बल बैठकर माथे को जमीन पर टिकाएं और हाथ आगे बढ़ाएं।

प्राणायाम (सांस संबंधी अभ्यास) पीसीओडी के लिए:

प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुधारने और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है, जो पीसीओडी प्रबंधन में सहायक होता है।

  1. अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Alternate Nostril Breathing):

    • हार्मोनल संतुलन के लिए लाभकारी
    • मानसिक शांति देता है
  2. भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Breathing):

    • मेटाबॉलिज्म को तेज करता है
    • ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है
  3. कपालभाति प्राणायाम (Skull Shining Breathing):

    • पेट की चर्बी कम करता है
    • पाचन और हार्मोनल स्वास्थ्य में सुधार करता है

योगाभ्यास करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

  • नियमित रूप से योग का अभ्यास करें (कम से कम 30-45 मिनट)।
  • सुबह के समय योग करना अधिक फायदेमंद होता है।
  • संतुलित आहार के साथ योग को अपनाएं।
  • धीरे-धीरे योग का अभ्यास करें और अधिक खिंचाव से बचें।

यदि पीसीओडी के लक्षण गंभीर हैं, तो योग के साथ चिकित्सक से परामर्श भी आवश्यक है।

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