योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः॥ (योगसूत्र 1.2)
यह Patanjali का सबसे प्रसिद्ध सूत्र है।
शब्दार्थ:
योगः = योग
चित्त = मन, बुद्धि, अहंकार का समूह
वृत्ति = मन में उठने वाले विचार, भाव, कल्पनाएँ
निरोधः = रोकना, शांत करना, नियंत्रित करना
सरल अर्थ:
योग मन की चंचल वृत्तियों को शांत करने का नाम है।
गहराई से समझें:
हमारा मन हर समय सोचता रहता है—भूत, भविष्य, सुख, दुख, चिंता, कल्पना।
इन लगातार चलने वाली तरंगों को चित्तवृत्ति कहा जाता है।
जब ये तरंगें शांत हो जाती हैं, तब मन स्थिर होता है और साधक अपने वास्तविक स्वरूप को जान पाता है।
उदाहरण:
जैसे शांत झील में तल साफ दिखाई देता है,
वैसे ही शांत मन में आत्मा का सत्य दिखाई देता है।
व्यावहारिक संदेश:
ध्यान (Meditation) चित्तवृत्तियों को शांत करता है।
प्राणायाम मन को स्थिर बनाता है।
नियमित अभ्यास और वैराग्य से योग की अवस्था आती है।
यह सूत्र पूरे योग दर्शन का सार माना जाता है।
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