पार्श्व सुखासन विधि, लाभ, सावधानिया ( Parsva Sukhasana Method, Benefits, Precautions)

पार्श्व सुखासन (Parsva Sukhasana) 




पार्श्व सुखासन, योग की एक सरल लेकिन प्रभावशाली मुद्रा है, जिसे “Side Seated Pose” भी कहा जाता है। यह सुखासन का ही एक रूप है, जिसमें साधक सामान्य बैठी हुई अवस्था से शरीर को बगल की ओर खींचकर एक गहरा स्ट्रेच देता है। यह आसन देखने में सरल लगता है, लेकिन इसके नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आसन करने की विधि

सबसे पहले किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर योगा मैट बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। रीढ़ सीधी रखें और दोनों हाथ घुटनों पर रखें। अब गहरी सांस लेते हुए दाहिने हाथ को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और सिर के ऊपर से ले जाकर बाईं ओर झुकें। बायां हाथ जमीन पर टिकाकर शरीर को सहारा दें। ध्यान रखें कि रीढ़ और छाती पर ज़्यादा दबाव न पड़े, केवल बगल और कमर के हिस्से में खिंचाव महसूस होना चाहिए। इस स्थिति में सामान्य श्वास-प्रश्वास करते हुए 20 से 30 सेकंड तक रहें। फिर धीरे-धीरे मूल अवस्था में आएं। यही प्रक्रिया दूसरी ओर दोहराएं।

शारीरिक लाभ

1. रीढ़ की लचीलापन बढ़ाना – इस आसन से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है जिससे उसकी लचक और मजबूती बनी रहती है।
2. साइड स्ट्रेच – कमर, कूल्हों और पेट के किनारों की मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव मिलता है, जिससे वहां की जकड़न और चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
3. फेफड़ों की क्षमता बढ़ाना – जब हम बगल की ओर झुकते हैं तो छाती और फेफड़ों को अधिक फैलाव मिलता है, जिससे गहरी सांस लेने की आदत विकसित होती है और श्वसन तंत्र मजबूत होता है।
4. तनाव मुक्ति – शरीर को हल्कापन और मन को शांति मिलती है। यह आसन मानसिक थकान और तनाव को दूर करने में मदद करता है।
5. पाचन तंत्र में सुधार – शरीर के किनारों और पेट के हिस्से पर दबाव और खिंचाव से पाचन क्रिया बेहतर होती है।

मानसिक लाभ

पार्श्व सुखासन केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मन को भी स्थिर और शांत करता है। जब साधक इस आसन को गहरी सांसों के साथ करता है, तो उसका मन वर्तमान क्षण में केंद्रित हो जाता है। इससे एकाग्रता और ध्यान शक्ति बढ़ती है। नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी दूर होती है।

सावधानियाँ

यह आसन आसान है, लेकिन कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं। यदि किसी को पीठ या कमर में गंभीर चोट या दर्द हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसे न करें। गर्भवती महिलाएं भी डॉक्टर और योग प्रशिक्षक से परामर्श लेने के बाद ही इसका अभ्यास करें।

निष्कर्ष

पार्श्व सुखासन एक साधारण, सहज और प्रभावी योग मुद्रा है, जो शरीर की लचक, ऊर्जा और श्वसन क्षमता को बढ़ाने में सहायक है। यह आसन सभी उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है, खासकर उन लोगों के लिए जो दिनभर बैठे रहते हैं और जिनकी कमर तथा पीठ अकसर दर्द करती रहती है। केवल कुछ मिनट प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करने से शरीर स्वस्थ, मन शांत और जीवन संतुलित बन सकता है।

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